1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. दिल्ली में प्रदर्शन से पहले सुप्रीम कोर्ट का बयान, कहा- 'मेट्रो स्टेशन और रेलवे पर पूरी रोक पर दोबारा विचार की जरूरत'

दिल्ली में प्रदर्शन से पहले सुप्रीम कोर्ट का बयान, कहा- 'मेट्रो स्टेशन और रेलवे पर पूरी रोक पर दोबारा विचार की जरूरत'

 Reported By: Atul Bhatia,  Written By: Subhash Kumar
 Published : Oct 09, 2026 03:36 pm IST,  Updated : Oct 09, 2026 04:46 pm IST

दिल्ली में 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी ने प्रदर्शन का ऐलान किया है। इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद केंद्र सरकार से कहा है कि मेट्रो स्टेशन और रेलवे पर पूरी रोक पर दोबारा विचार की जरूरत है।

supreme court on delhi metro and train closes before protest- India TV Hindi
सांकेतिक फोटो। Image Source : PTI/ANI

दिल्ली में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन से पहले मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और कई ट्रेनों को रद्द करने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। CPI(M) के महासचिव और पूर्व राज्यसभा सांसद एमए बेबी ने यह याचिका दाखिल कर कोर्ट से तुरंत दखल देने की मांग की थी। आपको बता दें कि ये प्रदर्शन मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया (SIR) और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर बुलाया गया है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने 8 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) को पत्र लिखकर 57 मेट्रो स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट बंद करने को कहा था। यह बंदी 9 अक्टूबर की रात 9 बजे से शुरू होकर हालात सामान्य होने तक जारी रखने की बात कही गई है। याचिका के मुताबिक, इस फैसले का असर सिर्फ प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों पर नहीं, बल्कि दिल्ली के आम लोगों पर भी पड़ेगा। अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को मेट्रो स्टेशन और रेलवे पर पूरी रोक पर दोबारा विचार करने को कहा है। हालांकि,सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि हम प्रदर्शन की अनुमति पर विचार नहीं करेंगे।

याचिका में क्या मांग की गई?

एमए बेबी की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था कि बंद किए जाने वाले स्टेशनों में सुप्रीम कोर्ट, हौज खास, लाजपत नगर, कश्मीरी गेट, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, शाहदरा और रोहिणी समेत कई इलाके शामिल हैं। याचिका में दावा किया गया है कि इनमें से कई स्टेशन अस्पतालों, कॉलेजों, अदालतों और रिहायशी इलाकों तक पहुंचने के लिए जरूरी हैं। याचिका में 10 अक्टूबर को नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच पहुंचने वाली कई मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने के फैसले पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस और सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस का भी जिक्र है।

याचिका के अनुसार, इस फैसले से इलाज कराने आ रहे मरीजों, छात्रों, यात्रियों और दूसरे लोगों को परेशानी हो सकती है। याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया है कि दिल्ली आने वाले कुछ लोगों को दूसरे राज्यों में रोका गया और हिरासत में लिया गया। याचिका में कहा गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आ रहे लोगों को केवल इसी वजह से रोकना सही नहीं है।

प्रदर्शन की इजाजत देने की मांग

याचिका में कहा गया है कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के लिए तय जगह है और वहां शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार लोगों को मिलना चाहिए। याचिकाकर्ता का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस जरूरी कदम उठा सकती है, लेकिन इसके नाम पर पूरे शहर की मेट्रो सेवाओं को बंद करना और लंबी दूरी की ट्रेनों को रद्द करना सही नहीं है। एमए बेबी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के फैसले को रोका जाए और मेट्रो सेवाएं सामान्य की जाएं। साथ ही, रद्द की गई ट्रेनों को जहां तक संभव हो दोबारा चलाने, प्रभावित यात्रियों को पूरा रिफंड और दूसरे सफर की व्यवस्था देने की मांग भी की गई है। याचिका में कोर्ट से यह निर्देश देने की मांग की गई है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाजत दी जाए और प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आ रहे लोगों को केवल इस वजह से न रोका जाए। याचिका के साथ तुरंत अंतरिम राहत देने की अर्जी भी दाखिल की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मेट्रो स्टेशन और रेलवे पर पूरी रोक पर दोबारा विचार की जरूरत है। सॉलिसिटर जनरल ने आश्वस्त किया है कि वह इस पर अधिकारियों से बात करेंगे ताकि लोगों को असुविधा न हो। ऐसे कदम उठाए जाएंगे जो प्रदर्शन की स्थिति के मुताबिक संतुलित होंगे। ट्रैफिक का प्रवाह भी सुनिश्चित किया जाएगा। लोगों के लिए एडवाइजरी भी जारी की जाएगी ताकि उन्हें असुविधा न हो।

CJI सूर्यकांत की बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान दी गई दलीलें इस प्रकार हैं-:

  1. वकील - 57 मेट्रो स्टेशन बंद हैं। यह उन फैसलों के खिलाफ है जो कहते हैं कि कार्रवाई को संतुलित रखने को कहते हैं
  2. कोर्ट - क्या कोई आयोजक आया है?
  3. सॉलिसिटर जनरल (तुषार मेहता) - सिब्बल ने कहा था कि वह लेकर आएंगे
  4. सिब्बल - कोई आयोजक यहां नहीं है
  5. कोर्ट - तब हम प्रदर्शन की अनुमति पर विचार नहीं करेंगे। लेकिन मेट्रो स्टेशन जैसी सुविधाएं बंद करने से लाखों लोगों को दिक्कत होगी। हमें इसे देखना होगा
  6. CJI - कोर्ट की ही बात करें तो कई वकीलों के पास गाड़ी हो सकती है, लेकिन बहुत सा स्टाफ मेट्रो से आता है
  7. सॉलिसिटर - हम लोगों की असुविधा के पहलू पर विचार करेंगे
  8. वकील - अगर जगह-जगह बैरिकेड हैं तो कार भी कैसे चलेगी?
  9. CJI सूर्यकांत ने कहा मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने को लेकर हमें गंभीर चिंता है
  10. हम उन लाखों लोगों को लेकर चिंतित हैं, जो अपनी रोजी-रोटी के लिए गुरुग्राम, पूर्वी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली और अन्य इलाकों से सफर करते हैं
  11. कोर्ट - लोगों को यह बताया जाए कि कहां बैरिकेडिंग है, उसके बदले किस सड़क का इस्तेमाल किया जा सकता है
  12. सॉलिसिटर जनरल - मैं पूरी ज़िम्मेदारी से कुछ कहना चाहता हूँ। 20 जून को प्रदर्शन की अनुमति मांगी गई जो पुलिस की तरफ से दी गई। 1 दिन की अनुमति लेकर 17 दिन तक बैठे रहे। संसद की तरफ जाने की भी कोशिश की गई
  13. सॉलिसिटर- उन्हें संसद में जाने से रोकने में 200 से ज़्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए
  14. सॉलिसिटर - ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जैसे पूरी दिल्ली को ब्लॉक कर दिया गया है। इंटरनेट पर रोक सीमित क्षेत्र में है
  15. सॉलिसिटर - महिला पुलिसकर्मियों का मोलेस्टेशन हुआ। जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, वह सबकी सुरक्षा के लिए है
  16. कोर्ट - हम प्रदर्शन पर सुनवाई नहीं कर रहे हैं क्योंकि यहां कोई आयोजक नहीं आया है
  17. सॉलिसिटर- मेट्रो और ट्रेन को लेकर कोर्ट ने जो कहा है, उस पर मैं सरकार से चर्चा करूंगा और जरूरी कदम उठाए जाएंगे
  18. CJI - हमारे विचार में प्रदर्शन की जगह (जंतर-मंतर) की भौगोलिक स्थिति को लेकर समस्या है। जगह छोटी भी है। कोई वैकल्पिक जगह सोची जानी चाहिए
  19. CJI - जगह की कमी के चलते प्रदर्शनकारियों के मौलिक अधिकार भी प्रभावित होते हैं। भोजन, सैनिटेशन, एंबुलेंस जैसी तमाम बातों में समस्या होती है
  20. जस्टिस बागची - हमने मेट्रो और ट्रेन से जुड़ी बातों को नोट किया है। सड़क पर भी परिवहन की व्यवस्था होनी चाहिए। इन चीजों को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता
  21. सॉलिसिटर- कभी-कभी पूरी रोक लगानी पड़ती है
  22. जस्टिस बागची- स्थिति के मुताबिक कदम उठाए जाने चाहिए, लेकिन पूरी रोक ठीक नहीं होगी
  23. CJI- लोगों में निश्चितता होनी चाहिए कि क्या और कब उपलब्ध है
  24. वृंदा ग्रोवर - लोगों को प्रदर्शन में न आने की चेतावनी दी जा रही है
  25. सॉलिसिटर - अभी तो यह कह रही थीं कि हम आयोजकों की तरफ से नहीं हैं
  26. वृंदा - हम नागरिक की हैसियत से बोल रहे हैं
  27. कोर्ट - फिलहाल हमारी सुनवाई लोगों की असुविधा को लेकर है

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा- "हमारे सामने मेट्रो और ट्रेन को लेकर जारी आदेश रखे गए। BNSS 163 के तहत अगस्त में जारी आदेश को भी रखा गया। हमें बताया गया कि नई दिल्ली और निजामुद्दीन स्टेशन से ट्रेनों को रोका गया है। हमने इस बात की अनुमति दी थी कि आयोजक हमारे सामने अपनी बात रख सकते हैं। लेकिन यहां आए वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि वह आयोजकों की तरफ से नहीं आए हैं। ऐसे में हमारी सुनवाई सार्वजनिक परिवहन पर पाबंदी से लोगों की असुविधा को लेकर है। मेट्रो स्टेशन और रेलवे पर पूरी रोक पर दोबारा विचार की जरूरत है। सॉलिसिटर जनरल ने आश्वस्त किया है कि वह इस पर अधिकारियों से बात करेंगे ताकि लोगों को असुविधा न हो। ऐसे कदम उठाए जाएंगे जो प्रदर्शन की स्थिति के मुताबिक संतुलित होंगे। ट्रैफिक का प्रवाह भी सुनिश्चित किया जाएगा। लोगों के लिए एडवाइजरी भी जारी की जाएगी ताकि उन्हें असुविधा न हो।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा है कि 10 अक्टूबर को होने वाले विरोध-प्रदर्शनों के मद्देनजर दिल्ली के लिए ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह बंद न किया जाए और न ही दिल्ली मेट्रो स्टेशनों को बंद किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सेवाओं को नियंत्रित तरीके से जारी रखने को कहा है ताकि आम जनता को कोई परेशानी न हो।

ये भी पढ़ें- Jantar Mantar Protest 2.0 से पहले CEC ज्ञानेश कुमार की Z+ सुरक्षा बढ़ाई गई, अब मिली कौन सी सेक्यूरिटी?

जंतर-मंतर प्रदर्शन की FIR रद्द करने के फैसले को चुनौती, SC ने सुनवाई से किया इनकार, कहा- युवाओं को कानूनी उलझनों में नहीं डालना चाहते

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत।